कविताएँ

:POEMS:

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उलझन

छोटे बच्चे 

अड़ियल घोड़ा

सो जा 

चिबिल्ली बिल्ली 

जाड़ा आया 

हुआ सवेरा कौआ बोला 

क्या इसे पढ़ सकोगे ?

रोटी 

सवेरा

नानी का कम्बल

मक्खी की निगाह

एक सवाल

जुड़वाँ की मुसीबत

नानी का संदूक

क्यों

चूहे चार

चीन  का सौदागर

मुन्नी की हैरानी

गर्मी के मजे

बाल विनय

प्रार्थना

मुन्नी और पिल्ला

फूल

दिवाली

सेना के जवान

बेवकूफ गुडिया

सुन्दर पास पड़ोस बनाओ

गंगा की बाढ़

चिंगारी

आंधी

सहपाठा

एक गुरु के शिष्य

जंगल में क्या होता है

एक मित्र

बाल विनय 2

फूल तुम्हारा मुस्काना

बड़ा होने पर

बच्चों मेरा प्रश्न बताओ 

बालक की कामना

बड़ा होने पर 2

बाल लीला

कभी न

बड़ा होने पर 3

चलो मदरसे

कबूतर

चमेली

सहेली

नल

संसार किसका है

 मै कौन हूँ

एक तरंग

माता का लाल

वीर प्रतिज्ञा

क्या बैठे हो 

बढ़े चलो 

फूलों का गीत 

वीर न अपनी बान छोड़ते 

क्या

कहो मत करो 

आम 

सीखो 

मेरी माता 

मेरा मन

भालू 

बसंत 

माता का लाल 

जब मैं कुछ बढ़ जाऊंगा 

गुड़ियों का घर 

वर्षा की बहार 

मेरा मुन्नू  

तीनो बहिने

चूहा

पकड़ चाँद को यदि मैं पाता

एक सवाल 2

गुब्बारा लो 

सुनहली और काली 

मेरी छाया 

बछड़ा

धूल

वाटिका 

हिमालय

वर्षा की बूंदे 

पानी 

इन्द्रधनुष

आकाश

वर्षा ऋतु

शाम 

गर्मी

बसंत 2 

दिन 

सवेरा

ऊषा काल

स्कूल में बरसात 

खिलौना

बरात

जामुन

मंगवा छाता

छुट्टी

नाव

घोड़ा

जादूगर और डाकू 

बाल विनय

तारे 

मोटर 

रेल

आई नानी 

कागज़ की नाव

चल बे घोड़े 

मुन्नी और पिल्ला 2

खेल 

घाम 

शिशु गीत 

भोला 

भाड़

किरण का सन्देश 

आफत 

गुड़िया की बीमारी

  मुन्नी रानी 

ऊँट और सियार

  जाड़ा

    कल्लू चाचा

आई नानी

  प्रार्थना  

मुन्नी और कुत्ता 

नन्हा मुन्ना 

श्याम  बिहारी 

पंखा कुली

 चार तुम चार हम

सो जा गुड़िया 

सन्देश  

 क्या इसे पढ़ सकोगे

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9 comments:

  1. great work--------------cheers!!!!!!!!!!!!!
    excellent themes and stanza's------------------

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  2. well done!!!!!!
    great work!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!
    kripya srinath ji ki kucch aur kavitain daale

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  3. good effort,nice presentation!!!!***

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  4. ठाकुर श्रीनाथ सिंह बाल साहित्य के दिग्गजों में से हैं। उनकी ढेर सारी बाल कविताओं को एक साथ पढ़ने का आनंद किसी दुर्लभ खजाने को पा लेने जैसा है।...उन्हें पढ़कर जाना जा सकता है कि बाल कविता क्या होती है और क्या हो सकती है! इसीलिए मुझे नजर आईं तो लगा, इन्हें सभी को पढ़वाना चाहिए। - प्र.म.

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  5. जी बिलकुल सही कहा आपने। उनकी कई कविताएँ मैंने कविताकोश में पढ़ी थीं। सचमुच सीधे दिल में उतर जाती हैं उनकी कविताएँ।-Faheem Ahmad

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  6. Shri nath singh ki likht paridesh ki sair,avishkaro ki katha (baal upanyas)bht acchi lagi

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