Sunday, 16 June 2024

Cycle 2019

Saturday, 8 June 2024

Balsakha 1927

Saturday, 6 October 2018

Birth anniversary of Thakur Srinath Singh

Birth Anniversary Of Thakur Srinath Singh published in 1st October, Allahabad edition of Dainik Jagran Newspaper 



Birth Anniversary Of Thakur Srinath Singh published in 1st October, Allahabad edition of Dainik Jagran Newspaper 



Sunday, 29 July 2018

Saturday, 3 February 2018

Seekho Kavita-video#3



Friday, 26 January 2018

Seekho Kavita-Video 2



Seekho kavita-Video 1





Friday, 5 January 2018

Photograph-9

Srinath Singh is honored by the then UP Chief minister Sri.Mulayam Singh Yadav

Srinath Singh is honored by the then UP Chief minister Sri.Mulayam Singh Yadav

Sunday, 8 October 2017

Saturday, 29 October 2016

चलती फिरती गोभी


नारायन अपने माँ बाप का अकेला लड़का था |इसी लिये वह माँ बाप को प्यारा भी बहुत था |वह दिन भर बाग में खेलता था , पौधों को खराब करता था , पर कोई मना करता था तो रोने लगता था |एक दिन वह बाग में खड़ा रो रहा था |जब उसे रोते रोते बहुत देर हो गई तो उसे एक बूढ़ा आदमी दिखाई पड़ा |उस आदमी ने पूछा -"बेटा ! क्यों रोते हो ? " नारायन बोला -"यह जो अमरुद का पेड़ है मैं इसकी सब पत्तियों को तोड़ डालना चाहता हूँ ,
 पर माली  तोड़ने नहीं देता ?"  
यह सुन कर बूढ़ा बोला -"माली तो अच्छा ही करता है | भला पत्तियाँ तोड़ कर क्या पाओगे ?" नारायन ने कहा -"जब पत्तियाँ न रहेंगी तो अमरुद के फलों में खूब धूप लगेगी | इससे वे जल्दी पक  जायेंगे |इसलिये |" बूढ़ा बोला -"तब फलों को चिड़ियाँ खा जाएँगी |"यह सुनकर नरायन कुछ न बोला और रोता ही रहा |तब बूढ़े ने कहा -"अच्छा , तुम इसके सिवाय और क्या चाहते हो ?"नरायन ने कहा --मैं चाहता हूँ कि मेरे मन में जो आये मैं वही बन जाऊं |" यह सुन कर बूढ़े ने नरायन को एक फूल दिया और कहा इसे सूँघ तुम जो चाहोगे वही बन जाओगे | लेकिन यदि तुम अपनी माँ के पैर छू लोगे तो फिर जैसे हो वैसे ही हो जाओगे | इसके बाद बूढ़ा गायब होगया |
बूढ़े के गायब हो जाने के बाद नरायन ने सोचा कि मैं गोभी बन जाऊं  तो अच्छा है | माली मुझे पहचान न सकेगा और मैं उसे खूब परेशान करूँगा | बस वह फूल सूंघ कर गोभी बन गया | उसके हाथ पाँव सर आँखें सब गायब हो
गये | जहा गोभी के पेड़ लगे थे वहीँ जाकर वह खड़ा होगया | उसी समय माली उधर आ निकला | नरायन को देख कर उसने समझा की यह सब गोभियों से कोई अच्छी गोभी है | बस माली एक ओर चला गया | माली के जाते ही नरायन बाग मै उत्पात मचने लगा |
उसने कहीं जमीन खोद डाली , कहीं गमले तोड़ और कहीं पौधे उखाड़ डाले | इत्तिफाक से माली घूमता घामता फिर आगया | उससे देखकर नरायन गोभियों में जामिलने के लिये भागा | माली ने देखा कि एक गोभी का पेड दौड़ा जा रहा है | यह अनहोनी बात देख कर वह कुछ डरा | धीरे धीरे वह गोभियों के पास गया और नरायन को पकड़ना चाहा | नरायन फिर भागा और चिल्लाया | इस बार गोभी को आदमी की तरह भागते और चिल्लाते देख कर माली इतना डर गया कि वह बाग ही छोड़कर भाग गया | माली को डर कर भागते देख नरायन ने सोचा की अब गाँव में चल कर जो मिले उसी को डराना चहिये | बस वह गाँव की ओर चल पड़ा | इधर उधर दौड़ने लगा | लड़के लडकियाँ उसको देख कर छिपने लगे | कुत्ते भौंकने लगे और बूढ़े जवान सब उसको भूत समझ कर मारने चले |सारे गाँव में हल्ला मच गया कि गोभी आदमी की तरह चलती है और बोलती है |मालूम नहीं क्या होने वाला है जिसकी यह सूचना है |दौड़ते दौड़ते नरायन जब थक गया तो वह भाग कर गाँव के बाहर चला गया |जाड़े का मौसम  था |धूप ही में पड़ रहा और सोने लगा |
इधर नरायन सो रहा था उधर उसके माँ बाप उसके लिये दुखी होने लगे |माली ने दिन डूबते डूबते आकर कहा कि अब वह बाग की रखवाली नहीं कर सकता क्योंकि वहाँ गोभी आदमी की तरह चलती हैं और आदमी की बोली बोलती है |यह सुन कर नरायन के माँ बाप अपने बेटे के विषय में सोचने लगे |उन्होंने सारे गाँव में ढूँढ़ डाला पर नरायन का कहीं भी पता न चला |तब बेचारे रोते पीटते लाचार होकर अपने घर लौट आये |जहाँ , नरायन सो रहा था ,वहीँ कुछ मजदूर खेत में काम करके शाम को आये |वे आग जला कर रोटी बनाने की तैयारी करने लगे |एक मजदूर ने नरायन को देखा तो समझा कि गोभी पड़ी है |वह उसे उठाकर ले आया और धोने के लिये छोड़ दिया इससे नरायन की नींद खुल गई और वह घर की ओर दौड़ पड़ा |यह सब देखकर मजदूर भी डर गए |जब नरायन घर में घुसा तब उसने देखा कि उसकी माता रो रही थी ,नरायन को देखकर उसने समझा कि वही गोभी घर में आ गई है |वह एक ओर को भागी |तब नरायन बोला "माँ ! माँ मैं हूँ |"अपने बेटे की बोली पहचान कर माँ खड़ी हो गयी |नरायन ने जाकर उसके पांव छुए | बस वह फिर पहले का सा नरायन हो गया और गोभी गायब हो गयी |माँ ने देखा कि नरायन सिर से पैर तक भीगा है |उसने उसके कपड़े बदले और इस प्रकार दिन भर गायब रहने का कारण पूछा |नरायन ने सारी कथा सुनाई| उस दिन रात भर यही चर्चा होती रही | कहते हैं फिर नरायन ने कभी शरारत नहीं की |क्योंकि उसे मालूम था कि जो लड़का शरारत करता है और दूसरों को सताता है वह खुद भी दुखी होता है |
(शिशु से )

  
                                                                                                                         

नारायन अपने माँ बाप का अकेला लड़का था |इसी लिये वह माँ बाप को प्यारा भी बहुत था |वह दिन भर बाग में खेलता था , पौधों को खराब करता था , पर कोई मना करता था तो रोने लगता था |एक दिन वह बाग में खड़ा रो रहा था |जब उसे रोते रोते बहुत देर हो गई तो उसे एक बूढ़ा आदमी दिखाई पड़ा |उस आदमी ने पूछा -"बेटा ! क्यों रोते हो ? " नारायन बोला -"यह जो अमरुद का पेड़ है मैं इसकी सब पत्तियों को तोड़ डालना चाहता हूँ ,
 पर माली  तोड़ने नहीं देता ?"  
यह सुन कर बूढ़ा बोला -"माली तो अच्छा ही करता है | भला पत्तियाँ तोड़ कर क्या पाओगे ?" नारायन ने कहा -"जब पत्तियाँ न रहेंगी तो अमरुद के फलों में खूब धूप लगेगी | इससे वे जल्दी पक  जायेंगे |इसलिये |" बूढ़ा बोला -"तब फलों को चिड़ियाँ खा जाएँगी |"यह सुनकर नरायन कुछ न बोला और रोता ही रहा |तब बूढ़े ने कहा -"अच्छा , तुम इसके सिवाय और क्या चाहते हो ?"नरायन ने कहा --मैं चाहता हूँ कि मेरे मन में जो आये मैं वही बन जाऊं |" यह सुन कर बूढ़े ने नरायन को एक फूल दिया और कहा इसे सूँघ तुम जो चाहोगे वही बन जाओगे | लेकिन यदि तुम अपनी माँ के पैर छू लोगे तो फिर जैसे हो वैसे ही हो जाओगे | इसके बाद बूढ़ा गायब होगया |
बूढ़े के गायब हो जाने के बाद नरायन ने सोचा कि मैं गोभी बन जाऊं  तो अच्छा है | माली मुझे पहचान न सकेगा और मैं उसे खूब परेशान करूँगा | बस वह फूल सूंघ कर गोभी बन गया | उसके हाथ पाँव सर आँखें सब गायब हो
गये | जहा गोभी के पेड़ लगे थे वहीँ जाकर वह खड़ा होगया | उसी समय माली उधर आ निकला | नरायन को देख कर उसने समझा की यह सब गोभियों से कोई अच्छी गोभी है | बस माली एक ओर चला गया | माली के जाते ही नरायन बाग मै उत्पात मचने लगा |
उसने कहीं जमीन खोद डाली , कहीं गमले तोड़ और कहीं पौधे उखाड़ डाले | इत्तिफाक से माली घूमता घामता फिर आगया | उससे देखकर नरायन गोभियों में जामिलने के लिये भागा | माली ने देखा कि एक गोभी का पेड दौड़ा जा रहा है | यह अनहोनी बात देख कर वह कुछ डरा | धीरे धीरे वह गोभियों के पास गया और नरायन को पकड़ना चाहा | नरायन फिर भागा और चिल्लाया | इस बार गोभी को आदमी की तरह भागते और चिल्लाते देख कर माली इतना डर गया कि वह बाग ही छोड़कर भाग गया | माली को डर कर भागते देख नरायन ने सोचा की अब गाँव में चल कर जो मिले उसी को डराना चहिये | बस वह गाँव की ओर चल पड़ा | इधर उधर दौड़ने लगा | लड़के लडकियाँ उसको देख कर छिपने लगे | कुत्ते भौंकने लगे और बूढ़े जवान सब उसको भूत समझ कर मारने चले |सारे गाँव में हल्ला मच गया कि गोभी आदमी की तरह चलती है और बोलती है |मालूम नहीं क्या होने वाला है जिसकी यह सूचना है |दौड़ते दौड़ते नरायन जब थक गया तो वह भाग कर गाँव के बाहर चला गया |जाड़े का मौसम  था |धूप ही में पड़ रहा और सोने लगा |
इधर नरायन सो रहा था उधर उसके माँ बाप उसके लिये दुखी होने लगे |माली ने दिन डूबते डूबते आकर कहा कि अब वह बाग की रखवाली नहीं कर सकता क्योंकि वहाँ गोभी आदमी की तरह चलती हैं और आदमी की बोली बोलती है |यह सुन कर नरायन के माँ बाप अपने बेटे के विषय में सोचने लगे |उन्होंने सारे गाँव में ढूँढ़ डाला पर नरायन का कहीं भी पता न चला |तब बेचारे रोते पीटते लाचार होकर अपने घर लौट आये |जहाँ , नरायन सो रहा था ,वहीँ कुछ मजदूर खेत में काम करके शाम को आये |वे आग जला कर रोटी बनाने की तैयारी करने लगे |एक मजदूर ने नरायन को देखा तो समझा कि गोभी पड़ी है |वह उसे उठाकर ले आया और धोने के लिये छोड़ दिया इससे नरायन की नींद खुल गई और वह घर की ओर दौड़ पड़ा |यह सब देखकर मजदूर भी डर गए |जब नरायन घर में घुसा तब उसने देखा कि उसकी माता रो रही थी ,नरायन को देखकर उसने समझा कि वही गोभी घर में आ गई है |वह एक ओर को भागी |तब नरायन बोला "माँ ! माँ मैं हूँ |"अपने बेटे की बोली पहचान कर माँ खड़ी हो गयी |नरायन ने जाकर उसके पांव छुए | बस वह फिर पहले का सा नरायन हो गया और गोभी गायब हो गयी |माँ ने देखा कि नरायन सिर से पैर तक भीगा है |उसने उसके कपड़े बदले और इस प्रकार दिन भर गायब रहने का कारण पूछा |नरायन ने सारी कथा सुनाई| उस दिन रात भर यही चर्चा होती रही | कहते हैं फिर नरायन ने कभी शरारत नहीं की |क्योंकि उसे मालूम था कि जो लड़का शरारत करता है और दूसरों को सताता है वह खुद भी दुखी होता है |
(शिशु से )

  
                                                                                                                         

Saturday, 8 October 2016

Photograph-9





Wednesday, 20 July 2016

बालसखा

बालसखा-(जनवरी -1917)

बालसखा-(फरवरी -1917)

संपादक-श्रीनाथ सिंह

बालसखा - 1927 

बालसखा-(जुलाई -1928) 

बालसखा-(अगस्त -1928)

बालसखा-(सितम्बर -1928)

बालसखा-(अक्टूबर -1928)

बालसखा-(नवम्बर -1928)

बालसखा-(दिसम्बर -1928)

बालसखा-(जनवरी -1929)

बालसखा-(फरवरी -1929)

बालसखा-(मार्च -1929)

बालसखा-(अप्रैल -1929)

बालसखा-(मई -1929)

बालसखा-(जून -1929)

बालसखा-(जुलाई -1929)

बालसखा-(अगस्त1929)

बालसखा-(सितम्बर -1929)

बालसखा-(अक्टूबर -1929)

बालसखा-(नवम्बर -1929)

बालसखा-(दिसम्बर -1929)

बालसखा (विभिन्न वर्षों की झांकी एवं सम्पादकीय)-


1932

1933

1934

1936 

1937 

1938 

1939 

1940 

1941 

1942

1943

1944
------------------------------------------

बालसखा-(जुलाई -1944)

बालसखा

 
HINDI RHYMES AND STORIESDesign by Ipietoon Blogger Template